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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ये धड़कता हुआ दिल उस के हवाले कर दूँ
एक भी शख़्स अगर शहर में ज़िंदा मिल जाए

फ़रहत एहसास




ये तेरा मेरा झगड़ा है दुनिया को बीच में क्यूँ डालें
घर के अंदर की बातों पर ग़ैरों को गवाह नहीं करते

फ़रहत एहसास




आँखों में बसे हो तुम आँखों में अयाँ हो कर
दिल ही में न रह जाओ आँखों से निहाँ हो कर

फ़रहत कानपुरी




दौलत-ए-अहद-ए-जवानी हो गए
चंद लम्हे जो कहानी हो गए

फ़रहत कानपुरी




दिल की राहें जुदा हैं दुनिया से
कोई भी राहबर नहीं होता

फ़रहत कानपुरी




दुनिया ने ख़ूब समझा दुनिया ने ख़ूब परखा
मेरी नज़र को देखा जब आप की नज़र से

फ़रहत कानपुरी




'फ़रहत' तिरे नग़मों की वो शोहरत है जहाँ में
वल्लाह तिरा रंग-ए-सुख़न याद रहेगा

फ़रहत कानपुरी