कुछ कटी हिम्मत-ए-सवाल में उम्र
कुछ उमीद-ए-जवाब में गुज़री
फ़ानी बदायुनी
क्या बला थी अदा-ए-पुर्सिश-ए-यार
मुझ से इज़हार-ए-मुद्दआ न हुआ
फ़ानी बदायुनी
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मैं ने 'फ़ानी' डूबती देखी है नब्ज़-ए-काएनात
जब मिज़ाज-ए-यार कुछ बरहम नज़र आया मुझे
फ़ानी बदायुनी
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मर के टूटा है कहीं सिलसिला-ए-क़ैद-ए-हयात
मगर इतना है कि ज़ंजीर बदल जाती है
फ़ानी बदायुनी
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मौजों की सियासत से मायूस न हो 'फ़ानी'
गिर्दाब की हर तह में साहिल नज़र आता है
फ़ानी बदायुनी
मौत आने तक न आए अब जो आए हो तो हाए
ज़िंदगी मुश्किल ही थी मरना भी मुश्किल हो गया
फ़ानी बदायुनी
मौत का इंतिज़ार बाक़ी है
आप का इंतिज़ार था न रहा
फ़ानी बदायुनी

