फैलते हुए शहरो अपनी वहशतें रोको
मेरे घर के आँगन पर आसमान रहने दो
अज़रा नक़वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
चार सम्तें आईना सी हर तरफ़
तुम को खो देने का मंज़र और मैं
अज़रा परवीन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
रंग अपने जो थे भर भी कहाँ पाए कभी हम
हम ने तो सदा रद्द-ए-अमल में ही बसर की
अज़रा परवीन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
सिमट गई तो शबनम फूल सितारा थी
बिफर के मेरी लहर लहर अँगारा थी
अज़रा परवीन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
उस ने मेरे नाम सूरज चाँद तारे लिख दिया
मेरा दिल मिट्टी पे रख अपने लब रोता रहा
अज़रा परवीन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ज़मीं के और तक़ाज़े फ़लक कुछ और कहे
क़लम भी चुप है कि अब मोड़ ले कहानी क्या
अज़रा परवीन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
आगही ने दिए इबहाम के धोके क्या क्या
शरह-ए-अल्फ़ाज़ जो लिक्खी तो इशारे लिक्खे
अज़रा वहीद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

