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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

सिफ़ारिश हम-दमों की उन का जाते वक़्त ये कहना
कि जब तड़पे मिरी तस्वीर सीने से लगा देना

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब




सीना से सीना मिला देना तो कुछ मुश्किल नहीं
यार मुश्किल तो तिरे दिल से मिलाना दिल का है

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब




अब तिरे हिज्र में यूँ उम्र बसर होती है
शाम होती है तो रो रो के सहर होती है

अनवापुल हसन अनवार




बे-ख़याली में भी फिर उन का ख़याल आता है
वही तस्वीर मिरे पेश-ए-नज़र होती है

अनवापुल हसन अनवार




भूलने वाले तुझे याद किया है बरसों
दिल-ए-वीराँ को यूँ आबाद किया है बरसों

अनवापुल हसन अनवार




बिजली गिरी थी कब ये किसी को ख़बर नहीं
अब तक चमन में आग लगी है बहार में

अनवापुल हसन अनवार




कुछ अंदलीब का ख़ून जिगर भी है शामिल
गुलों की बज़्म की रंगीनियाँ बढ़ाने में

अनवापुल हसन अनवार