फ़ितरत का ये सितम भी है 'दानिश' अजीब चीज़
सर कैसे कैसे कैसी कुलाहों में रख दिए
अक़ील दानिश
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मैं भी सच कहता हूँ इस जुर्म में दुनिया वालो
मेरे हाथों में भी इक ज़हर का पियाला दे दो
अक़ील दानिश
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शायद कहीं इस प्यार में थोड़ी सी कमी है
और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती
अक़ील नोमानी
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आँधियाँ सब कुछ उड़ा कर ले गईं
पेड़ पर पत्ता न फल दामन में था
अक़ील शादाब
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बराए-नाम सही कोई मेहरबान तो है
हमारे सर पे भी होने को आसमान तो है
अक़ील शादाब
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चादर मैली हो गई अब कैसे लौटाऊँ
अपने पिया के सामने जाते हुए शरमाऊँ
अक़ील शादाब
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गुमान ही असासा था यक़ीन का
यक़ीन ही गुमान में नहीं रहा
अक़ील शादाब
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