गोया कि सब ग़लत हैं मिरी बद-गुमानियाँ
देखे तो कोई शक्ल तुम्हारी हया के साथ
अनवर देहलवी
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हर शय को इंतिहा है यक़ीं है कि वस्ल हो
अर्सा बहुत खिंचा है मिरी इंतिज़ार का
अनवर देहलवी
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हश्र को मानता हूँ बे-देखे
हाए हंगामा उस की महफ़िल का
अनवर देहलवी
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कैसी हया कहाँ की वफ़ा पास-ए-ख़ल्क़ क्या
हाँ ये सही कि आप को आना यहाँ न था
अनवर देहलवी
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कैसी हया कहाँ की वफ़ा पास-ए-ख़ल्क़ क्या
हाँ ये सही कि आप को आना यहाँ न था
अनवर देहलवी
कमर बाँधी है तौबा तोड़ने पर
इलाही ख़ैर अज़्म-ए-नातवाँ की
अनवर देहलवी
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किस सोच में हैं आइने को आप देख कर
मेरी तरफ़ तो देखिए सरकार क्या हुआ
अनवर देहलवी
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