नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत
कि पिन्हाँ हूँ दर्द-ए-निहानी की सूरत
अनवर देहलवी
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नींद का काम गरचे आना है
मेरी आँखों में पर नहीं आती
अनवर देहलवी
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फेंकिए क्यूँ मय-ए-नाक़िस साक़ी
शैख़-साहिब की ज़ियाफ़त ही सही
अनवर देहलवी
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पी भी जा शैख़ कि साक़ी की इनायत है शराब
मैं तिरे बदले क़यामत में गुनहगार रहा
अनवर देहलवी
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क़ामत ही लिखा हम ने सदा जा-ए-क़यामत
क़ामत ने भुलाया तिरे इम्ला-ए-क़यामत
अनवर देहलवी
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शर्म भी इक तरह की चोरी है
वो बदन को चुराए बैठे हैं
अनवर देहलवी
सूरत छुपाइए किसी सूरत-परस्त से
हम दिल में नक़्श आप की तस्वीर कर चुके
अनवर देहलवी
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