हमें बादा-कश-ए-दर्द-ए-तमन्ना
हमीं पर बंद है मय-ख़ाना दिल का
अनवर मोअज़्ज़म
हुजूम-ए-सुब्ह की तन्हाइयों में डूब गए
वो क़ाफ़िले जो अँधेरों की अंजुमन से चले
अनवर मोअज़्ज़म
कौन रोया पस-ए-दीवार-ए-चमन आख़िर-ए-शब
क्यूँ सबा लौट गई राहगुज़र से पूछो
अनवर मोअज़्ज़म
न मिला पर न मिला इश्क़ को अंदाज़-ए-जुनूँ
हम ने मजनूँ की भी आशुफ़्ता-सरी देखी है
अनवर मोअज़्ज़म
सब दिखाते हैं तिरा अक्स मिरी आँखों में
हम ज़माने को इसी तौर से महबूब हुए
अनवर मोअज़्ज़म
वक़्त झूमे कहीं बहके कहीं थम जाए कहीं
खिल उठें नक़्श-ए-क़दम यूँ कोई दीवाना चले
अनवर मोअज़्ज़म
वो हबीब हो कि रहबर वो रक़ीब हो कि रहज़न
जो दयार-ए-दिल से गुज़रे उसे हम-कलाम कर लो
अनवर मोअज़्ज़म

