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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

उस के वारिस नज़र नहीं आए
शायद उस लाश के पते हैं बहुत

साक़ी फ़ारुक़ी




वही आँखों में और आँखों से पोशीदा भी रहता है
मिरी यादों में इक भूला हुआ चेहरा भी रहता है

साक़ी फ़ारुक़ी




वही जीने की आज़ादी वही मरने की जल्दी है
दिवाली देख ली हम ने दसहरे कर लिए हम ने

साक़ी फ़ारुक़ी




वही जीने की आज़ादी वही मरने की जल्दी है
दिवाली देख ली हम ने दसहरे कर लिए हम ने

साक़ी फ़ारुक़ी




वो ख़ुदा है तो मिरी रूह में इक़रार करे
क्यूँ परेशान करे दूर का बसने वाला

साक़ी फ़ारुक़ी




वो मिरी रूह की उलझन का सबब जानता है
जिस्म की प्यास बुझाने पे भी राज़ी निकला

साक़ी फ़ारुक़ी




वो मिरी रूह की उलझन का सबब जानता है
जिस्म की प्यास बुझाने पे भी राज़ी निकला

साक़ी फ़ारुक़ी