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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा
ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा

साक़ी फ़ारुक़ी




मुझे समझने की कोशिश न की मोहब्बत ने
ये और बात ज़रा पेचदार मैं भी था

साक़ी फ़ारुक़ी




मुझे समझने की कोशिश न की मोहब्बत ने
ये और बात ज़रा पेचदार मैं भी था

साक़ी फ़ारुक़ी




नए चराग़ जला याद के ख़राबे में
वतन में रात सही रौशनी मनाया कर

साक़ी फ़ारुक़ी




नामों का इक हुजूम सही मेरे आस-पास
दिल सुन के एक नाम धड़कता ज़रूर है

साक़ी फ़ारुक़ी




नामों का इक हुजूम सही मेरे आस-पास
दिल सुन के एक नाम धड़कता ज़रूर है

साक़ी फ़ारुक़ी




प्यास बढ़ती जा रही है बहता दरिया देख कर
भागती जाती हैं लहरें ये तमाशा देख कर

साक़ी फ़ारुक़ी