मैं तुझे फिर ज़मीं दिखाऊँगा
देख मुझ से न आसमान बिगड़
सख़ी लख़नवी
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मिरे लाशे को कांधा दे के बोले
चलो तुर्बत में अब तुम को सुलाएँ
सख़ी लख़नवी
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न आशिक़ हैं ज़माने में न माशूक़
इधर हम रह गए हैं और उधर आप
सख़ी लख़नवी
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न आशिक़ हैं ज़माने में न माशूक़
इधर हम रह गए हैं और उधर आप
सख़ी लख़नवी
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न छोड़ा हिज्र में भी ख़ाना-ए-तन
रगड़वाएगी कब तक एड़ियाँ रूह
सख़ी लख़नवी
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नक़्द-ए-दिल का बड़ा तक़ाज़ा है
गोया उन की ज़मीं जोते हैं
सख़ी लख़नवी
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नक़्द-ए-दिल का बड़ा तक़ाज़ा है
गोया उन की ज़मीं जोते हैं
सख़ी लख़नवी
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