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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

तस्वीर-ए-चश्म-ए-यार का ख़्वाहाँ है बाग़बाँ
ईजाद होगी नर्गिस-ए-बीमार की जगह

सख़ी लख़नवी




था हिना से जो शोख़ मेरा ख़ूँ
बोले ये लाल लाल है कुछ और

सख़ी लख़नवी




था हिना से जो शोख़ मेरा ख़ूँ
बोले ये लाल लाल है कुछ और

सख़ी लख़नवी




था मिरा नाख़ुन-ए-तराशीदा
औज-ए-गर्दूं पे जो हिलाल हुआ

सख़ी लख़नवी




तीस दिन यार अब न आएगा
इस महीने का नाम ख़ाली है

सख़ी लख़नवी




तीस दिन यार अब न आएगा
इस महीने का नाम ख़ाली है

सख़ी लख़नवी




तुम न आसान को आसाँ समझो
वर्ना मुश्किल मिरी मुश्किल तो नहीं

सख़ी लख़नवी