तस्वीर-ए-चश्म-ए-यार का ख़्वाहाँ है बाग़बाँ
ईजाद होगी नर्गिस-ए-बीमार की जगह
सख़ी लख़नवी
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था हिना से जो शोख़ मेरा ख़ूँ
बोले ये लाल लाल है कुछ और
सख़ी लख़नवी
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था हिना से जो शोख़ मेरा ख़ूँ
बोले ये लाल लाल है कुछ और
सख़ी लख़नवी
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था मिरा नाख़ुन-ए-तराशीदा
औज-ए-गर्दूं पे जो हिलाल हुआ
सख़ी लख़नवी
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तीस दिन यार अब न आएगा
इस महीने का नाम ख़ाली है
सख़ी लख़नवी
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तीस दिन यार अब न आएगा
इस महीने का नाम ख़ाली है
सख़ी लख़नवी
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तुम न आसान को आसाँ समझो
वर्ना मुश्किल मिरी मुश्किल तो नहीं
सख़ी लख़नवी
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