दिल ने पाया क़रार पहलू में
गर्दिश-ए-काएनात ख़त्म हुई
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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दिल-ए-नादाँ तिरी हालत क्या है
तू न अपनों में न बेगानों में
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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दिल-ए-नादाँ तिरी हालत क्या है
तू न अपनों में न बेगानों में
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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दिल-ए-वीराँ को देखते क्या हो
ये वही आरज़ू की बस्ती है
सैफ़ुद्दीन सैफ़
दुश्मन गए तो कशमकश-ए-दोस्ती गई
दुश्मन गए कि दोस्त हमारे चले गए
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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दुश्मन गए तो कशमकश-ए-दोस्ती गई
दुश्मन गए कि दोस्त हमारे चले गए
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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ग़म-गुसारो बहुत उदास हूँ मैं
आज बहला सको तो आ जाओ
सैफ़ुद्दीन सैफ़
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