जिन से ज़िंदा हो यक़ीन ओ आगही की आबरू
इश्क़ की राहों में कुछ ऐसे गुमाँ करते चलो
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
जिस अहद में लुट जाए फ़क़ीरों की कमाई
उस अहद के सुल्तान से कुछ भूल हुई है
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
जिस अहद में लुट जाए फ़क़ीरों की कमाई
उस अहद के सुल्तान से कुछ भूल हुई है
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
जिस दौर में लुट जाए ग़रीबों कमाई
उस दौर के सुल्तान से कुछ भूल हुई है
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
जो चमन की हयात को डस ले
उस कली को बबूल कहता हूँ
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
जो चमन की हयात को डस ले
उस कली को बबूल कहता हूँ
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
काँटे तो ख़ैर काँटे हैं इस का गिला ही क्या
फूलों की वारदात से घबरा के पी गया
साग़र सिद्दीक़ी

