छलके हुए थे जाम परेशाँ थी ज़ुल्फ़-ए-यार
कुछ ऐसे हादसात से घबरा के पी गया
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
दुनिया-ए-हादसात है इक दर्दनाक गीत
दुनिया-ए-हादसात से घबरा के पी गया
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
दुनिया-ए-हादसात है इक दर्दनाक गीत
दुनिया-ए-हादसात से घबरा के पी गया
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
एक नग़्मा इक तारा एक ग़ुंचा एक जाम
ऐ ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-दौराँ तुझे मेरा सलाम
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं
लोग अब ज़िंदगी के मुजरिम हैं
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं
लोग अब ज़िंदगी के मुजरिम हैं
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
साग़र सिद्दीक़ी
टैग:
| दुआ |
| 2 लाइन शायरी |

