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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

अपनी साँसें मिरी साँसों में मिला के रोना
जब भी रोना मुझे सीने से लगा के रोना

सफ़दर सलीम सियाल




इक ख़्वाब सा देखा था तो मैं काँप उठा था
फिर मैं ने कोई ख़्वाब न देखा उसे कहना

सफ़दर सलीम सियाल




ख़ुद-सर है अगर वो तो मरासिम न बढ़ाओ
ख़ुद्दार अगर हो तो अना तंग करेगी

सफ़दर सलीम सियाल




ख़ुद-सर है अगर वो तो मरासिम न बढ़ाओ
ख़ुद्दार अगर हो तो अना तंग करेगी

सफ़दर सलीम सियाल




हमें माशूक़ को अपना बनाना तक नहीं आता
बनाने वाले आईना बना लेते हैं पत्थर से

सफ़ी औरंगाबादी




मुश्किल है रोक आह-ए-दिल-ए-दाग़दार की
कहते हैं सौ सुनार की और इक लुहार की

सफ़ी औरंगाबादी




मुश्किल है रोक आह-ए-दिल-ए-दाग़दार की
कहते हैं सौ सुनार की और इक लुहार की

सफ़ी औरंगाबादी