बनावट हो तो ऐसी हो कि जिस से सादगी टपके
ज़ियादा हो तो असली हुस्न छुप जाता है ज़ेवर से
सफ़ी लखनवी
दें भी जवाब-ए-ख़त कि न दें क्या ख़बर मुझे
क्यूँ अपने साथ ले न गया नामा-बर मुझे
सफ़ी लखनवी
दें भी जवाब-ए-ख़त कि न दें क्या ख़बर मुझे
क्यूँ अपने साथ ले न गया नामा-बर मुझे
सफ़ी लखनवी
देखे बग़ैर हाल ये है इज़्तिराब का
क्या जाने क्या हो पर्दा जो उट्ठे नक़ाब का
सफ़ी लखनवी
ग़ज़ल उस ने छेड़ी मुझे साज़ देना
ज़रा उम्र-ए-रफ़्ता को आवाज़ देना
सफ़ी लखनवी
ग़ज़ल उस ने छेड़ी मुझे साज़ देना
ज़रा उम्र-ए-रफ़्ता को आवाज़ देना
सफ़ी लखनवी
जनाज़ा रोक कर मेरा वो इस अंदाज़ से बोले
गली हम ने कही थी तुम तो दुनिया छोड़े जाते हो
सफ़ी लखनवी

