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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

तुम से मिलने का बहाना तक नहीं
और बिछड़ जाने के हीले हैं बहुत

सईद क़ैस




उसी के लुत्फ़ से बस्ती निहाल है सारी
तमाम पेड़ लगाए हुए उसी के हैं

सईद क़ैस




दोस्त बन बन के मिले मुझ को मिटाने वाले
मैं ने देखे हैं कई रंग ज़माने वाले

सईद राही




दोस्त बन बन के मिले मुझ को मिटाने वाले
मैं ने देखे हैं कई रंग ज़माने वाले

सईद राही




गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजे
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं

सईद राही




गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजिए
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं

सईद राही




गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजिए
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं

सईद राही