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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मैं न पीता तो तिरा लिख्खा ग़लत हो जाता
तेरे लिक्खे को निभाया क्या ख़ता की मैं ने

सईद राही




मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

सईद राही




रुस्वाई तो वैसे भी तक़दीर है आशिक़ की
ज़िल्लत भी मिली हम को उल्फ़त के फ़साने से

सईद राही




तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं
ऐसी तंहाई का जवाब नहीं

सईद राही




तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं
ऐसी तंहाई का जवाब नहीं

सईद राही




नहीं माँगते मस्ती-ए-जावेदाँ
हमें चाहिए मय मुदारात भर

सफ़दर मीर




अपनी साँसें मिरी साँसों में मिला के रोना
जब भी रोना मुझे सीने से लगा के रोना

सफ़दर सलीम सियाल