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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मनअ करते हो अबस यारो आज
उस के घर जाएँगे पर जाएँगे हम

रंगीन सआदत यार ख़ाँ




मनअ करते हो अबस यारो आज
उस के घर जाएँगे पर जाएँगे हम

रंगीन सआदत यार ख़ाँ




पा-बोस-ए-यार की हमें हसरत है ऐ नसीम
आहिस्ता आइओ तू हमारे मज़ार पर

रंगीन सआदत यार ख़ाँ




ता हश्र रहे ये दाग़ दिल का
या-रब न बुझे चराग़ दिल का

रंगीन सआदत यार ख़ाँ




ता हश्र रहे ये दाग़ दिल का
या-रब न बुझे चराग़ दिल का

रंगीन सआदत यार ख़ाँ




था जहाँ मय-ख़ाना बरपा उस जगह मस्जिद बनी
टूट कर मस्जिद को फिर देखा तो बुत-ख़ाने हुए

रंगीन सआदत यार ख़ाँ




वो न आए तो तू ही चल 'रंगीं'
इस में क्या तेरी शान जाती है

रंगीन सआदत यार ख़ाँ