ज़िंदगी का भी किया भरोसा है
ज़िंदगी की क़सम भी क्या खाऊँ
राणा गन्नौरी
बादल आए हैं घिर गुलाल के लाल
कुछ किसी का नहीं किसी को ख़याल
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
बादल आए हैं घिर गुलाल के लाल
कुछ किसी का नहीं किसी को ख़याल
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
गर्म इन रोज़ों में कुछ इश्क़ का बाज़ार नहीं
बेचता दिल को हूँ मैं कोई ख़रीदार नहीं
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
है ये दुनिया जा-ए-इबरत ख़ाक से इंसान की
बन गए कितने सुबू कितने ही पैमाने हुए
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
है ये दुनिया जा-ए-इबरत ख़ाक से इंसान की
बन गए कितने सुबू कितने ही पैमाने हुए
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
झूटा कभी न झूटा होवे
झूटे के आगे सच्चा रोवे
रंगीन सआदत यार ख़ाँ

