इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
राही मासूम रज़ा
ये चराग़ जैसे लम्हे कहीं राएगाँ न जाएँ
कोई ख़्वाब देख डालो कोई इंक़िलाब लाओ
राही मासूम रज़ा
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ज़िंदगी ढूँढ ले तू भी किसी दीवाने को
उस के गेसू तो मिरे प्यार ने सुलझाए हैं
राही मासूम रज़ा
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ईद का चाँद जो देखा तो तमन्ना लिपटी
उन से तक़रीब-ए-मुलाक़ात का रिश्ता निकला
रहमत क़रनी
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आदमी की तलाश में है ख़ुदा
आदमी को ख़ुदा नहीं मिलता
रईस अमरोहवी
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अब दिल की ये शक्ल हो गई है
जैसे कोई चीज़ खो गई है
रईस अमरोहवी
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अभी से शिकवा-ए-पस्त-ओ-बुलंद हम-सफ़रो
अभी तो राह बहुत साफ़ है अभी क्या है
रईस अमरोहवी
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