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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

आएगा मेरे बाद 'फ़रोग़' इन का ज़माना
जिस दौर का मैं हूँ मिरे अशआर नहीं हैं

रईस फ़रोग़




आएगा मेरे बाद 'फ़रोग़' इन का ज़माना
जिस दौर का मैं हूँ मिरे अशआर नहीं हैं

रईस फ़रोग़




अपने हालात से मैं सुल्ह तो कर लूँ लेकिन
मुझ में रू-पोश जो इक शख़्स है मर जाएगा

रईस फ़रोग़




फ़स्ल तुम्हारी अच्छी होगी जाओ हमारे कहने से
अपने गाँव की हर गोरी को नई चुनरिया ला देना

रईस फ़रोग़




हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते

रईस फ़रोग़




हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते

रईस फ़रोग़




इक यही दुनिया बदलती है 'फ़रोग़'
कैसी कैसी अजनबी दुनियाओं में

रईस फ़रोग़