यही ज़िंदगी मुसीबत यही ज़िंदगी मसर्रत
यही ज़िंदगी हक़ीक़त यही ज़िंदगी फ़साना
मुईन अहसन जज़्बी
यूँ बढ़ी साअत-ब-साअत लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-फ़िराक़
रफ़्ता रफ़्ता मैं ने ख़ुद को दुश्मन-ए-जाँ कर दिया
मुईन अहसन जज़्बी
ज़ब्त-ए-ग़म बे-सबब नहीं 'जज़्बी'
ख़लिश-ए-दिल बढ़ा रहा हूँ मैं
मुईन अहसन जज़्बी
कुछ कमाया नहीं बाज़ार-ए-ख़बर में रह कर
बंद दुक्कान करें बे-ख़बरी पेशा करें
मुईन नजमी
तेरी निगाह तो इस दौर की ज़कात हुई
जो मुस्तहिक़ है उसी तक नहीं पहुँचती है
मुईन शादाब
उस से मिलने की ख़ुशी ब'अद में दुख देती है
जश्न के ब'अद का सन्नाटा बहुत खलता है
मुईन शादाब
आप की कौन सी बढ़ी इज़्ज़त
मैं अगर बज़्म में ज़लील हुआ
मोमिन ख़ाँ मोमिन

