'दर्द' कुछ मालूम है ये लोग सब
किस तरफ़ से आए थे कीधर चले
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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दर्द तू जो करे है जी का ज़ियाँ
फ़ाएदा उस ज़ियान में कुछ है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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दर्द-ए-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान को
वर्ना ताअत के लिए कुछ कम न थे कर्र-ओ-बयाँ
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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दिल भी ऐ 'दर्द' क़तरा-ए-ख़ूँ था
आँसुओं में कहीं गिरा होगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
दिल भी तेरे ही ढंग सीखा है
आन में कुछ है आन में कुछ है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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दुश्मनी ने सुना न होवेगा
जो हमें दोस्ती ने दिखलाया
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
एक ईमान है बिसात अपनी
न इबादत न कुछ रियाज़त है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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