न हों पैसे तो इस्तक़बालियों से कुछ नहीं होगा
किसी शायर को ख़ाली तालियों से कुछ नहीं होगा
खालिद इरफ़ान
बात ये है कि सभी भाई मिरे दुश्मन हैं
मसअला ये है कि मैं यूसुफ़-ए-सानी भी नहीं
ख़ालिद कर्रार
कलीसा मौलवी राहिब पुजारी
कलस मीनार बुत मेहराब सहरा
ख़ालिद कर्रार
कोई तो आए सुनाए नवेद-ए-ताज़ा मुझे
उठो कि हश्र से पहले हिसाब होने लगा
ख़ालिद कर्रार
फिर इस के बाद मिरी रात बे-मिसाल हुई
उधर वो शोला-बदन था इधर मैं पानी था
ख़ालिद कर्रार
सच तो ये है कि मिरे पास ही दिरहम कम हैं
वर्ना इस शहर में इस दर्जा गिरानी भी नहीं
ख़ालिद कर्रार
दिल तोड़ने वाले को ख़बर हो कि अभी मैं
सर-ता-ब-क़दम इक दिल-ए-बीमार नहीं हूँ
ख़ालिद ख़्वाज़ा

