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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

आया था साथ ले के मोहब्बत की आफ़तें
जाएगा जान ले के ज़माना शबाब का

जिगर बिसवानी




हसरतों का हो गया है इस क़दर दिल में हुजूम
साँस रस्ता ढूँढती है आने जाने के लिए

जिगर जालंधरी




आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं
जैसे हर शय में किसी शय की कमी पाता हूँ मैं

जिगर मुरादाबादी




आई जब उन की याद तो आती चली गई
हर नक़्श-ए-मा-सिवा को मिटाती चली गई

जिगर मुरादाबादी




आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था
आया जो मेरे सामने मेरा ग़ुरूर था

जिगर मुरादाबादी




आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं
नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है

जिगर मुरादाबादी




आबाद अगर न दिल हो तो बरबाद कीजिए
गुलशन न बन सके तो बयाबाँ बनाइए

जिगर मुरादाबादी