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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से
याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया

जौन एलिया




मैं सहूँ कर्ब-ए-ज़िंदगी कब तक
रहे आख़िर तिरी कमी कब तक

जौन एलिया




मरहम-ए-हिज्र था अजब इक्सीर
अब तो हर ज़ख़्म भर गया होगा

जौन एलिया




मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझ को

जौन एलिया




मेरी हर बात बे-असर ही रही
नक़्स है कुछ मिरे बयान में क्या

जौन एलिया




मिल कर तपाक से न हमें कीजिए उदास
ख़ातिर न कीजिए कभी हम भी यहाँ के थे

जौन एलिया




मिल रही हो बड़े तपाक के साथ
मुझ को यकसर भुला चुकी हो क्या

जौन एलिया