EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या

जौन एलिया




भूल जाना नहीं गुनाह उसे
याद करना उसे सवाब नहीं

जौन एलिया




बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है

जौन एलिया




बोलते क्यूँ नहीं मिरे हक़ में
आबले पड़ गए ज़बान में क्या

जौन एलिया




चाँद ने तान ली है चादर-ए-अब्र
अब वो कपड़े बदल रही होगी

जौन एलिया




दाद-ओ-तहसीन का ये शोर है क्यूँ
हम तो ख़ुद से कलाम कर रहे हैं

जौन एलिया




दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

जौन एलिया