बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
जौन एलिया
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भूल जाना नहीं गुनाह उसे
याद करना उसे सवाब नहीं
जौन एलिया
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बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है
जौन एलिया
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बोलते क्यूँ नहीं मिरे हक़ में
आबले पड़ गए ज़बान में क्या
जौन एलिया
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चाँद ने तान ली है चादर-ए-अब्र
अब वो कपड़े बदल रही होगी
जौन एलिया
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दाद-ओ-तहसीन का ये शोर है क्यूँ
हम तो ख़ुद से कलाम कर रहे हैं
जौन एलिया
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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते
जौन एलिया

