आज बहुत दिन ब'अद मैं अपने कमरे तक आ निकला था
जूँ ही दरवाज़ा खोला है उस की ख़ुश्बू आई है
जौन एलिया
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आज मुझ को बहुत बुरा कह कर
आप ने नाम तो लिया मेरा
जौन एलिया
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आख़िरी बात तुम से कहना है
याद रखना न तुम कहा मेरा
जौन एलिया
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अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
जौन एलिया
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अब ख़ाक उड़ रही है यहाँ इंतिज़ार की
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर किसी जान-ए-जहाँ के थे
जौन एलिया
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अब कि जब जानाना तुम को है सभी पर ए'तिबार
अब तुम्हें जानाना मुझ पर ए'तिबार आया तो क्या
जौन एलिया
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अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
जौन एलिया
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