गो अपने हज़ार नाम रख लूँ
पर अपने सिवा मैं और क्या हूँ
जौन एलिया
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हाए वो उस का मौज-ख़ेज़ बदन
मैं तो प्यासा रहा लब-ए-जू भी
जौन एलिया
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हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ
आख़िर मिरे मिज़ाज में क्यूँ दख़्ल दे कोई
जौन एलिया
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हासिल-ए-कुन है ये जहान-ए-ख़राब
यही मुमकिन था इतनी उजलत में
जौन एलिया
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है वो बेचारगी का हाल कि हम
हर किसी को सलाम कर रहे हैं
जौन एलिया
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हैं दलीलें तिरे ख़िलाफ़ मगर
सोचता हूँ तिरी हिमायत में
जौन एलिया
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हम अजब हैं कि उस की बाहोँ में
शिकवा-ए-नारसाई करते हैं
जौन एलिया
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