महफ़िल में फूल ख़ुशियों के जो बाँटता रहा
तन्हाई में मिला तो बहुत ही उदास था
हनीफ़ तरीन
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पानी ने जिसे धूप की मिट्टी से बनाया
वो दाएरा-ए-रब्त बिगड़ने के लिए था
हनीफ़ तरीन
रेत पर जलते हुए देख सराबों के चराग़
अपने बिखराव में वो और सँवर जाता है
हनीफ़ तरीन
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रिश्ते नाते टूटे फूटे लगे हैं
जब भी अपना साया साथ नहीं होता
हनीफ़ तरीन
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ग़म की तकमील का सामान हुआ है पैदा
लाइक़-ए-फ़ख़्र मिरी बे-सर-ओ-सामानी है
हेंसन रेहानी
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हर ज़र्रा है जमाल की दुनिया लिए हुए
इंसाँ अगर हो दीदा-ए-बीना लिए हुए
हेंसन रेहानी
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तोड़ कर निकले क़फ़स तो गुम थी राह-ए-आशियाँ
वो अमल तदबीर का था ये अमल तक़दीर का
हेंसन रेहानी
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