न ख़्वाब ही से जगाया न इंतिज़ार किया
हम इस दफ़अ भी चले आए चूम कर उस को
अब्बास ताबिश
रात को जब याद आए तेरी ख़ुशबू-ए-क़बा
तेरे क़िस्से छेड़ते हैं रात की रानी से हम
अब्बास ताबिश
रात कमरे में न था मेरे अलावा कोई
मैं ने इस ख़ौफ़ से ख़ंजर न सिरहाने रक्खा
अब्बास ताबिश
फिर इस के ब'अद ये बाज़ार-ए-दिल नहीं लगना
ख़रीद लीजिए साहिब ग़ुलाम आख़िरी है
अब्बास ताबिश
पस-ए-ग़ुबार भी उड़ता ग़ुबार अपना था
तिरे बहाने हमें इंतिज़ार अपना था
अब्बास ताबिश
पहले तो हम छान आए ख़ाक सारे शहर की
तब कहीं जा कर खुला उस का मकाँ है सामने
अब्बास ताबिश
निहाल-ए-दर्द ये दिन तुझ पे क्यूँ उतरता नहीं
ये नील-कंठ कहीं तुझ से बद-गुमाँ ही न हो
अब्बास ताबिश
मेरा रंज-ए-मुस्तक़िल भी जैसे कम सा हो गया
मैं किसी को याद कर के ताज़ा-दम सा हो गया
अब्बास ताबिश
मेरे सीने से ज़रा कान लगा कर देखो
साँस चलती है कि ज़ंजीर-ज़नी होती है
अब्बास ताबिश

