याद में ख़्वाब में तसव्वुर में
आ कि आने के हैं हज़ार तरीक़
बयान मेरठी
तुम्हारी याद मेरा दिल ये दोनों चलते पुर्ज़े हैं
जो इन में से कोई मिटता मुझे पहले मिटा जाता
बेख़ुद देहलवी
आती है बात बात मुझे बार बार याद
कहता हूँ दौड़ दौड़ के क़ासिद से राह में
दाग़ देहलवी
लीजिए सुनिए अब अफ़्साना-ए-फ़ुर्क़त मुझ से
आप ने याद दिलाया तो मुझे याद आया
दाग़ देहलवी
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मेरे क़ाबू में न पहरों दिल-ए-नाशाद आया
वो मिरा भूलने वाला जो मुझे याद आया
दाग़ देहलवी
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मुझे याद करने से ये मुद्दआ था
निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते
दाग़ देहलवी
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
दाग़ देहलवी