बे-तकल्लुफ़ वो औरों से हैं
नाज़ उठाने को हम रह गए
फ़ना निज़ामी कानपुरी
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दिल से अगर कभी तिरा अरमान जाएगा
घर को लगा के आग ये मेहमान जाएगा
फ़ना निज़ामी कानपुरी
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दुनिया पे ऐसा वक़्त पड़ेगा कि एक दिन
इंसान की तलाश में इंसान जाएगा
फ़ना निज़ामी कानपुरी
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दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते
फ़ना निज़ामी कानपुरी
ग़ैरत-ए-अहल-ए-चमन को क्या हुआ
छोड़ आए आशियाँ जलता हुआ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
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ग़म से नाज़ुक ज़ब्त-ए-ग़म की बात है
ये भी दरिया है मगर ठहरा हुआ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
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गुल तो गुल ख़ार तक चुन लिए हैं
फिर भी ख़ाली है गुलचीं का दामन
फ़ना निज़ामी कानपुरी
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