निगाहें करती रह जाती हैं हिज्जे
वो जब चेहरे से इमला बोलता है
फ़हमी बदायूनी
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परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के
वफ़ा करने की नौबत आ गई है
फ़हमी बदायूनी
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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा
कितना आसान था इलाज मिरा
फ़हमी बदायूनी
शहसवारों ने रौशनी माँगी
मैं ने बैसाखियाँ जला डालीं
फ़हमी बदायूनी
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उसे ले कर जो गाड़ी जा चुकी है
मैं शायद उस के नीचे आ रहा हूँ
फ़हमी बदायूनी
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किस से अब आरज़ू-ए-वस्ल करें
इस ख़राबे में कोई मर्द कहाँ
फ़हमीदा रियाज़
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आज फिर आईना देखा है कई साल के बाद
कहीं इस बार भी उजलत तो नहीं की गई है
फ़ैसल अजमी
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