ज़िंदगी अब तू मुझे और खिलौने ला दे
ऐसे ख़्वाबों से तो मैं दिल नहीं बहला सकता
फ़हीम शनास काज़मी
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आज पैवंद की ज़रूरत है
ये सज़ा है रफ़ू न करने की
फ़हमी बदायूनी
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आप तशरीफ़ लाए थे इक रोज़
दूसरे रोज़ ए'तिबार हुआ
फ़हमी बदायूनी
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बदन का ज़िक्र बातिल है तो आओ
बिना सर पैर की बातें करेंगे
फ़हमी बदायूनी
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी
डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
फ़हमी बदायूनी
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ख़ूँ पिला कर जो शेर पाला था
उस ने सर्कस में नौकरी कर ली
फ़हमी बदायूनी
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मैं ने उस की तरफ़ से ख़त लिक्खा
और अपने पते पे भेज दिया
फ़हमी बदायूनी
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