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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ज़िंदगी अब तू मुझे और खिलौने ला दे
ऐसे ख़्वाबों से तो मैं दिल नहीं बहला सकता

फ़हीम शनास काज़मी




आज पैवंद की ज़रूरत है
ये सज़ा है रफ़ू न करने की

फ़हमी बदायूनी




आप तशरीफ़ लाए थे इक रोज़
दूसरे रोज़ ए'तिबार हुआ

फ़हमी बदायूनी




बदन का ज़िक्र बातिल है तो आओ
बिना सर पैर की बातें करेंगे

फ़हमी बदायूनी




ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी
डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में

फ़हमी बदायूनी




ख़ूँ पिला कर जो शेर पाला था
उस ने सर्कस में नौकरी कर ली

फ़हमी बदायूनी




मैं ने उस की तरफ़ से ख़त लिक्खा
और अपने पते पे भेज दिया

फ़हमी बदायूनी