फ़ुसून-ए-शेर से हम उस मह-ए-गुरेज़ाँ को
ख़लाओं से सर-ए-काग़ज़ उतार लाए हैं
एहसान दानिश
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हाँ आप को देखा था मोहब्बत से हमीं ने
जी सारे ज़माने के गुनहगार हमीं थे
एहसान दानिश
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हम चटानें हैं कोई रेत के साहिल तो नहीं
शौक़ से शहर-पनाहों में लगा दो हम को
एहसान दानिश
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हम हक़ीक़त हैं तो तस्लीम न करने का सबब
हाँ अगर हर्फ़-ए-ग़लत हैं तो मिटा दो हम को
एहसान दानिश
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हुस्न को दुनिया की आँखों से न देख
अपनी इक तर्ज़-ए-नज़र ईजाद कर
एहसान दानिश
टैग:
| हुस्न |
| 2 लाइन शायरी |
कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम
तुम ये इंसाफ़ से सोचो तो दुआ दो हम को
एहसान दानिश
ख़ाक से सैंकड़ों उगे ख़ुर्शीद
है अंधेरा मगर चराग़-तले
एहसान दानिश
टैग:
| Charagh |
| 2 लाइन शायरी |

