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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ये राह-ए-इश्क़ है आख़िर कोई मज़ाक़ नहीं
सऊबतों से जो घबरा गए हों घर जाएँ

दिल अय्यूबी




आग़ाज़-ए-मोहब्बत से अंजाम-ए-मोहब्बत तक
गुज़रा है जो कुछ हम पर तुम ने भी सुना होगा

दिल शाहजहाँपुरी




आरज़ू लुत्फ़ तलब इश्क़ सरासर नाकाम
मुब्तला ज़िंदगी-ए-दिल इन्हीं औहाम में है

दिल शाहजहाँपुरी




असर-ए-इश्क़ से हूँ सूरत-ए-शम्अ ख़ामोश
ये मुरक़्क़ा है मिरी हसरत-ए-गोयाई का

दिल शाहजहाँपुरी




हम को बेचैन किए जाते हैं
हाए क्या शय वो लिए जाते हैं

दिल शाहजहाँपुरी




हुस्न-ए-ख़ुद-बीं को हुआ और सिवा नाज़-ए-हिजाब
शौक़ जब हद से बढ़ा चश्म-ए-तमाशाई का

दिल शाहजहाँपुरी




क्या जाने किस ख़याल से छोड़ा प हाल-ए-ज़ार
मुझ पर बड़ा करम है मिरे चारासाज़ का

दिल शाहजहाँपुरी