ये राह-ए-इश्क़ है आख़िर कोई मज़ाक़ नहीं
सऊबतों से जो घबरा गए हों घर जाएँ
दिल अय्यूबी
आग़ाज़-ए-मोहब्बत से अंजाम-ए-मोहब्बत तक
गुज़रा है जो कुछ हम पर तुम ने भी सुना होगा
दिल शाहजहाँपुरी
आरज़ू लुत्फ़ तलब इश्क़ सरासर नाकाम
मुब्तला ज़िंदगी-ए-दिल इन्हीं औहाम में है
दिल शाहजहाँपुरी
असर-ए-इश्क़ से हूँ सूरत-ए-शम्अ ख़ामोश
ये मुरक़्क़ा है मिरी हसरत-ए-गोयाई का
दिल शाहजहाँपुरी
हम को बेचैन किए जाते हैं
हाए क्या शय वो लिए जाते हैं
दिल शाहजहाँपुरी
हुस्न-ए-ख़ुद-बीं को हुआ और सिवा नाज़-ए-हिजाब
शौक़ जब हद से बढ़ा चश्म-ए-तमाशाई का
दिल शाहजहाँपुरी
क्या जाने किस ख़याल से छोड़ा प हाल-ए-ज़ार
मुझ पर बड़ा करम है मिरे चारासाज़ का
दिल शाहजहाँपुरी

