रक़म करने कूँ वस्फ़-ए-ज़ुल्फ़-ए-दिलदार
मुझे हर वक़्त मश्क़-ए-लाम है बस
दाऊद औरंगाबादी
सर काट क्यूँ जलाते हैं रौशन दिलाँ के तईं
आहन-दिली पे ख़ल्क़ की ख़ंदाँ हूँ मिस्ल-ए-शम्अ'
दाऊद औरंगाबादी
शीशा-ए-आबरू सँभाल ऐ दिल
दौर उल्टा चला है दुनिया का
दाऊद औरंगाबादी
सुन नसीहत मिरी ऐ ज़ाहिद-ए-ख़ुश्क
अश्क के आब बिन वुज़ू मत कर
दाऊद औरंगाबादी
तुझ हिज्र की अगन कूँ बूझाने ऐ संग दिल
कोई आब-ज़न-रफ़ीक़ ब-जुज़ चश्म-ए-तर नहीं
दाऊद औरंगाबादी
यक क़दम राह-ए-दोस्त है 'दाऊद'
लेकिन अफ़्सोस पा-ए-बख़्त है लंग
दाऊद औरंगाबादी
यारब तू मुझे मेरे गुनाहों की सज़ा दे
या मुझ को गुनाहों के लिए अपनी रज़ा दे
दीप्ति मिश्रा

