ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा
दाग़ देहलवी
लीजिए सुनिए अब अफ़्साना-ए-फ़ुर्क़त मुझ से
आप ने याद दिलाया तो मुझे याद आया
दाग़ देहलवी
मैं भी हैरान हूँ ऐ 'दाग़' कि ये बात है क्या
वादा वो करते हैं आता है तबस्सुम मुझ को
दाग़ देहलवी
मर्ग-ए-दुश्मन का ज़ियादा तुम से है मुझ को मलाल
दुश्मनी का लुत्फ़ शिकवों का मज़ा जाता रहा
दाग़ देहलवी
मेरे क़ाबू में न पहरों दिल-ए-नाशाद आया
वो मिरा भूलने वाला जो मुझे याद आया
दाग़ देहलवी
'मीर' का रंग बरतना नहीं आसाँ ऐ 'दाग़'
अपने दीवाँ से मिला देखिए दीवाँ उन का
दाग़ देहलवी
मिरी आह का तुम असर देख लेना
वो आएँगे थामे जिगर देख लेना
दाग़ देहलवी

