कोई दाना कोई दीवाना मिला
शहर में हर शख़्स बेगाना मिला
चन्द्रभान ख़याल
क्या उसी का नाम है रा'नाई-ए-बज़्म-ए-हयात
तंग कमरा सर्द बिस्तर और तन्हा आदमी
चन्द्रभान ख़याल
ले गया वो छीन कर मेरी जवानी
उस पे बस यूँही झपट कर रह गया मैं
चन्द्रभान ख़याल
लोग मंज़िल की तरफ़ लपके हैं लेकिन
भीड़ में ग़फ़लत भी शामिल हो गई है
चन्द्रभान ख़याल
मिलता नहीं ख़ुद अपने क़दम का निशाँ मुझे
किन मरहलों में छोड़ गया कारवाँ मुझे
चन्द्रभान ख़याल
नज़र में शोख़ शबीहें लिए हुए है सहर
अभी न कोई इधर से धुआँ धुआँ गुज़रे
चन्द्रभान ख़याल
पास से देखा तो जाना किस क़दर मग़्मूम हैं
अन-गिनत चेहरे कि जिन को शादमाँ समझा था मैं
चन्द्रभान ख़याल

