वो अब्र घिरा झूम के रहमत के दिन आए
पीने के पिलाने के मसर्रत के दिन आए
अज़ीज़ हैदराबादी
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वो सुनें या न सुनें नाला-ओ-फ़रियाद 'अज़ीज़'
आप हरगिज़ न करें तर्क तक़ाज़ा अपना
अज़ीज़ हैदराबादी
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वो ये कह कर दाग़ देते हैं मुझे
फूल से पहले समर आते नहीं
अज़ीज़ हैदराबादी
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ज़ोर क़िस्मत पे चल नहीं सकता
ख़ामुशी इख़्तियार करता हूँ
अज़ीज़ हैदराबादी
आईना छोड़ के देखा किए सूरत मेरी
दिल-ए-मुज़्तर ने मिरे उन को सँवरने न दिया
अज़ीज़ लखनवी
आप जिस दिल से गुरेज़ाँ थे उसी दिल से मिले
देखिए ढूँढ निकाला है कहाँ से मैं ने
अज़ीज़ लखनवी
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अहद में तेरे ज़ुल्म क्या न हुआ
ख़ैर गुज़री कि तू ख़ुदा न हुआ
अज़ीज़ लखनवी
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