किसी बुज़दिल की सूरत घर से ये बाहर निकलता है
मिरा ग़ुस्सा किसी कमज़ोर के ऊपर निकलता है
अज़हर नवाज़
कोई किरदार अदा करता है क़ीमत इस की
जब कहानी को नया मोड़ दिया जाता है
अज़हर नवाज़
मोहतरम कह के मुझे उस ने पशेमान किया
कोई पहलू न मिला जब मिरी रुस्वाई का
अज़हर नवाज़
मुझ को हर सम्त ले के जाता है
एक इम्कान तेरे होने का
अज़हर नवाज़
सुबूत बर्क़ की ग़ारत-गरी का किस से मिले
कि आशियाँ था जहाँ अब वहाँ धुआँ भी नहीं
अज़हर सईद
चमन उजाड़ने वालो तुम्हें ख़ुदा समझे
तुम्हें न आई हया फूल तो हमारे गए
अज़ीम हैदर सय्यद
देने वाले तू मुझे नींद न दे ख़्वाब तो दे
मुझ को महताब से आगे भी कहीं जाना है
अज़ीम हैदर सय्यद

