पत्थर जैसी आँखों में सूरज के ख़्वाब लगाते हैं
और फिर हम इस ख़्वाब के हर मंज़र से बाहर रहते हैं
अज़हर नक़वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
फिर रेत के दरिया पे कोई प्यासा मुसाफ़िर
लिखता है वही एक कहानी कई दिन से
अज़हर नक़वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
रात भर चाँद से होती रहें तेरी बातें
रात खोले हैं सितारों ने तिरे राज़ बहुत
अज़हर नक़वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तेरा ही रक़्स सिलसिला-ए-अक्स-ए-ख़्वाब है
इस अश्क-ए-नीम-शब से शब-ए-माहताब तक
अज़हर नक़वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
चारासाज़ो मिरा इलाज करो
आज कुछ दर्द में कमी सी है
अज़हर नवाज़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
जो मेरा झूट है अक्सर मिरे अंदर निकलता है
जिसे कम-तर समझता हूँ वही बेहतर निकलता है
अज़हर नवाज़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ख़ूबसूरत है सिर्फ़ बाहर से
ये इमारत भी आदमी सी है
अज़हर नवाज़
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

