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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

बहुत इरादा किया कोई काम करने का
मगर अमल न हुआ उलझनें ही ऐसी थीं

अनवर शऊर




बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है
हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है

अनवर शऊर




चले आया करो मेरी तरफ़ भी!
मोहब्बत करने वाला आदमी हूँ

अनवर शऊर




दोस्त कहता हूँ तुम्हें शाएर नहीं कहता 'शुऊर'
दोस्ती अपनी जगह है शाएरी अपनी जगह

अनवर शऊर




फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

अनवर शऊर




गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तन्हा

अनवर शऊर




गो मुझे एहसास-ए-तन्हाई रहा शिद्दत के साथ
काट दी आधी सदी एक अजनबी औरत के साथ

अनवर शऊर