गर यही है पास-ए-आदाब-ए-सुकूत
किस तरह फ़रियाद लब तक आएगी
अमीरुल्लाह तस्लीम
जाने दे सब्र ओ क़रार ओ होश को
तू कहाँ ऐ बे-क़रारी जाएगी
अमीरुल्लाह तस्लीम
ख़ाली सही बला से तसल्ली तो दिल को हो
रहने दो सामने मिरे साग़र शराब का
अमीरुल्लाह तस्लीम
कीजिए ऐसा जहाँ पैदा जहाँ कोई न हो
ज़र्रा-ओ-अख़तर ज़मीन-ओ-आसमाँ कोई न हो
अमीरुल्लाह तस्लीम
क्या ख़बर मुझ को ख़िज़ाँ क्या चीज़ है कैसी बहार
आँखें खोलीं आ के मैं ने ख़ाना-ए-सय्याद में
अमीरुल्लाह तस्लीम
नासेह ख़ता मुआफ़ सुनें क्या बहार में
हम इख़्तियार में हैं न दिल इख़्तियार में
अमीरुल्लाह तस्लीम
सुब्ह होती है शाम होती है
उम्र यूँही तमाम होती है
अमीरुल्लाह तस्लीम

