सुना है धूप को घर लौटने की जल्दी है
वो आज वक़्त से पहले ही शाम कर देगी
सदार आसिफ़
ये बात सच है कि वो ज़िंदगी नहीं मेरी
मगर वो मेरे लिए ज़िंदगी से कम भी नहीं
सदार आसिफ़
ये बात सच है कि वो ज़िंदगी नहीं मेरी
मगर वो मेरे लिए ज़िंदगी से कम भी नहीं
सदार आसिफ़
ये कैसे मरहले में फँस गया है मेरा घर मालिक
अगर छत को बचा भी लूँ तो फिर दीवार जाती है
सदार आसिफ़
हर-चंद शेर ओ शौक़ की बुनियाद है जुनूँ
चलता नहीं है काम ख़िरद के बग़ैर भी
सरदार अयाग़
हर-चंद शेर ओ शौक़ की बुनियाद है जुनूँ
चलता नहीं है काम ख़िरद के बग़ैर भी
सरदार अयाग़
आगे मेरे न तीखी मार ऐ शैख़
रात का माजरा सुना दूँगा
सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

