ग़म-ए-हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई
चले भी आओ कि दुनिया से जा रहा है कोई
सरदार अंजुम
ग़मों ने घेर लिया है मुझे तो क्या ग़म है
मैं मुस्कुरा के जियूँगा तिरी ख़ुशी के लिए
सरदार अंजुम
ग़मों ने घेर लिया है मुझे तो क्या ग़म है
मैं मुस्कुरा के जियूँगा तिरी ख़ुशी के लिए
सरदार अंजुम
कभी कभी तू मुझे याद कर तो लेती है
सुकून इतना सा काफ़ी है ज़िंदगी के लिए
सरदार अंजुम
सभी ने लगाया है चेहरे पे चेहरा
किसे याद रक्खें किसे भूल जाएँ
सरदार अंजुम
सभी ने लगाया है चेहरे पे चेहरा
किसे याद रक्खें किसे भूल जाएँ
सरदार अंजुम
वो मोड़ जिस ने हमें अजनबी बना डाला
उस एक मोड़ पे दिल अब भी गुनगुनाता है
सरदार अंजुम

