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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

शायद सवाब तुम को भी मिल जाए सब के साथ
सज्दे में गिर भी जाओ दुआ की किसे ख़बर

संदीप कोल नादिम




शायद सवाब तुम को भी मिल जाए सब के साथ
सज्दे में गिर भी जाओ दुआ की किसे ख़बर

संदीप कोल नादिम




दर-ब-दर होने से पहले कभी सोचा भी न था
घर मुझे रास न आया तो किधर जाऊँगा

साक़ी अमरोहवी




ख़्वाब था या शबाब था मेरा
दो सवालों का इक जवाब हूँ मैं

साक़ी अमरोहवी




कितने ही ग़म निखरने लगते हैं
एक लम्हे की शादमानी से

साक़ी अमरोहवी




कितने ही ग़म निखरने लगते हैं
एक लम्हे की शादमानी से

साक़ी अमरोहवी




मदरसा मेरा मेरी ज़ात में है
ख़ुद मोअल्लिम हूँ ख़ुद किताब हूँ मैं

साक़ी अमरोहवी